हर हर खंडेश्वर महादेव।हर हर खंडेश्वर महादेव।हर हर खंडेश्वर महादेव
खंडीघाट और हर हर खंडेश्वर महादेव मंदिर का वर्णन
हर हर खंडेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध तीर्थ धाम खंडीघाट चेमल, तहसील दुर्गुकोंदल, जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। यह तीर्थ स्थल जिला कांकेर से लगभग पचहत्तर किलोमीटर, भानुप्रतापपुर से लगभग तीस किलोमीटर और दुर्गूकोंदल से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खंडीघाट पर्वत में शिव पार्वती, श्री गणेश, माँ काली, माँ दुर्गा, हनुमान, राम लक्ष्मण जानकी, विष्णु-लक्ष्मी, मोहिनी माता और माता बहादुर कलारिन मंदिर आदि स्थित हैं। यहाँ शिवलिंग पर लोहतर माँ सोनादाई मंदिर से पानी की एक धारा हमेशा बहता रहता हैं। यहां मंदिर के अलावा देखने के लिए मोहिनी पत्थर, राजा ढाब और गुफा आदि है।
यहाँ प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर तीन दिवसीय मेला लगता है। यहाँ दूर-दूर से भक्तों का आना जाना हमेशा लगा रहता हैं और भक्तों के लिए मंदिर हमेशा खुला रहता हैं। वरिष्ठजन व बुजुर्ग लोगो से पूछने पर बताते हैं कि प्राचीन काल में राजा का एक गढ़ था जिसका नाम था भेजरगढ़। यहां राजा का हमेशा आना जाना होता था, राजा जब भी यहाँ आते थे तो भेजरगढ़ में रुकते थे और शिकार के लिए इसी पर्वत पर निकलते थे। वहीं एक जगह विश्राम करते थे, उसी जगह को ही राजा ढाब कहते हैं।
खंडीघाट पर्वत दो हिस्सों में बंटा हुआ हैं। इसके पीछे भी एक कथा हैं कहते हैं कि खंडीघाट पर्वत ऊंचा और लंबा होने के कारण बारिश के पानी से भरता ही जा रहा था और आसपास के गांवों को डुबोकर कांकेर नगर को छूने लगा था। यह देखकर राजा को अत्यधिक गुस्सा आया और पानी के अंतिम छोर अर्थात पर्वत पर कमान से तीर छोड़ दिया, पर तीर निशाने तक नहीं पहुंचा। फिर दूसरा तीर छोड़ा वो भी नहीं पहुंचा, तो फिर गुस्से से तीसरा तीर छोड़ा, जो पर्वत को दो भागों में विभाजन कर दिया और पानी धीरे धीरे कम हो गया। पानी के तेज बहाव से जो नदी बना, उसी नदी को ही खंडी नदी नाम से जानते हैं। और राजा ने तीन तीर मारा था वह पत्थर बना है, उसे तीर पत्थर के नाम से जानते हैं, जो अभी भी मौजूद हैं। इसी पर्वत में एक मोहिनी पत्थर था जिसे घिसकर ले जाते थे और जिसे मोहित करना होता था उस पर छिड़क देते थे, वह उनके वश में हो जाता था। उस जगह को मोहिनी माता कहते हैं। और इसी पर्वत में प्राचीनकाल में एक जगह ऐसा था जहाँ सिर्फ खाली शीशी रखकर कुछ समय बाद आने पर स्वतः ही शीशी में मदीरा भरा हुआ होता था। जिस जगह वर्तमान में माता बहादुर कलारिन मंदिर स्थित हैं।
इतना इतिहास और पुरातत्व होने के बावजूद आज भी खंडीघाट धाम सुख-सुविधाओ से वंचित हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए न ही सड़क मार्ग हैं। न ही पर्वत में चढ़ने उपयुक्त सीढ़ी हैं। न ही बिजली की सुविधा हैं, और न ही पीने के लिए पानी की सुविधा हैं। शासन-प्रशासन ने अब तक इस धाम को पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया हैं।
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